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बाल विवाह और बाल संरक्षण पर जिला स्तरीय कार्यशाला आयोजित, शिक्षकों को बच्चों के अधिकारों के प्रति किया गया जागरूक

By Riya Kumari

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बाल विवाह और बाल संरक्षण पर जिला स्तरीय कार्यशाला आयोजित, शिक्षकों को बच्चों के अधिकारों के प्रति किया गया जागरूक

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सोशल संवाद / जमशेदपुर: सामाजिक संस्था युवा (यूथ फॉर यूनिटी वॉलंटरी एक्शन) एवं गर्ल्स फर्स्ट फंड के संयुक्त तत्वावधान में साकची स्थित होटल कैनेलाइट में बाल विवाह एवं बाल संरक्षण विषय पर जिला स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में पोटका प्रखंड, जमशेदपुर एवं पश्चिम सिंहभूम के विभिन्न विद्यालयों के शिक्षकों ने भाग लेकर बाल अधिकारों और बाल सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर जानकारी प्राप्त की।

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कार्यशाला का उद्देश्य शिक्षकों की भूमिका को और अधिक प्रभावी बनाना था, ताकि बच्चों के सुरक्षित, सम्मानजनक और सशक्त भविष्य के निर्माण में उनकी सहभागिता सुनिश्चित की जा सके। कार्यक्रम में प्रतिज्ञा संस्था, रांची के सचिव अजय कुमार मुख्य प्रशिक्षक के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने सहभागितापूर्ण गतिविधियों और व्यावहारिक उदाहरणों के माध्यम से बाल संरक्षण से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की।

बाल विवाह, मानव तस्करी और POCSO कानून पर विशेष चर्चा

प्रशिक्षण सत्र के दौरान बच्चों के अधिकार, बाल विवाह के कारण और दुष्परिणाम, बाल विवाह एवं मानव तस्करी के बीच संबंध, शिक्षा पर बाल विवाह के प्रभाव, बाल संरक्षण कानून, पॉक्सो (POCSO) अधिनियम, ऑनलाइन दुर्व्यवहार की पहचान, शिकायत एवं रिपोर्टिंग प्रक्रिया जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत जानकारी दी गई।

इसके अलावा समुदाय, अभिभावकों, जनप्रतिनिधियों और सरकारी संस्थाओं की भूमिका पर भी चर्चा की गई। प्रतिभागियों को बताया गया कि बच्चों की सुरक्षा, शिक्षा और सम्मान के अधिकारों की रक्षा समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।

पंचायतों को निभानी होगी जवाबदेही: वार्णली चक्रवर्ती

युवा संस्था की सचिव वार्णली चक्रवर्ती ने अपने संबोधन में कहा कि पंचायतों को अपने क्षेत्र में होने वाले बाल विवाह की जवाबदेही सुनिश्चित करनी चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि ग्राम सभाओं में बाल विवाह, मानव तस्करी और बच्चों के पलायन जैसे मुद्दों को प्राथमिकता के साथ शामिल किया जाए।

उन्होंने शिक्षकों से अपील की कि वे बाल संरक्षण संबंधी विषयों को केवल पाठ्यक्रम तक सीमित न रखें, बल्कि अपने सामाजिक और शैक्षणिक कार्यों का भी अभिन्न हिस्सा बनाएं, ताकि ऐसी घटनाओं की समय रहते रोकथाम की जा सके।

अभिभावक-शिक्षक बैठकों में जागरूकता बढ़ाने पर जोर

कार्यशाला के दौरान शिक्षकों ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि कई मामलों में बाल विवाह की जानकारी होने के बावजूद लोग पहचान उजागर होने के डर से शिकायत दर्ज कराने से बचते हैं। प्रतिभागियों ने सुझाव दिया कि स्कूलों में आयोजित अभिभावक-शिक्षक बैठकों (PTM) में बाल विवाह और बाल संरक्षण जैसे मुद्दों पर नियमित चर्चा होनी चाहिए, ताकि समुदाय स्तर पर जागरूकता बढ़े और समय पर हस्तक्षेप किया जा सके।

उत्कृष्ट शिक्षकों को किया गया सम्मानित

कार्यक्रम में वरिष्ठ पत्रकार अन्नी अमृता विशेष रूप से उपस्थित रहीं। इस अवसर पर युवा संस्था के बोर्ड सदस्य नरेंद्र, ऊषा सबीना देवगम एवं नीता बोस भी मौजूद थे।

कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित शिक्षिका अनिता शर्मा एवं शिक्षक मनोज कुमार सिंह को शिक्षा के क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम के समापन पर परियोजना समन्वयक चांद मनी सवैयाँ ने सभी प्रतिभागियों, अतिथियों और प्रशिक्षकों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने युवा संस्था के कार्यकर्ताओं चांदमनी, अंजना, कापरा, रीला, चंद्रकला, अवंती, किरण, हेमंती एवं सिकंदर अरूप के योगदान की सराहना करते हुए कार्यशाला की सफलता का श्रेय पूरी टीम को दिया।

यह कार्यशाला बाल विवाह की रोकथाम, बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और समाज में बाल अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुई।

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