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यहाँ कल्कि अवतार में पूजे जाते है गणेश ; बढ़ रहा है गणेश जी का आकार, जाने रहस्य

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सोशल संवाद/डेस्क (रिपोर्ट : तमिश्री )- आपने कई गणेश मंदिरों में भगवान गणेश को उनके वाहन मूषक की सवारी करते देखा होगा, लेकिन मध्यप्रदेश के जबलपुर शहर में एक ऐसा गणेश मंदिर है, जहां भगवान मूषक की सवारी नहीं बल्कि घोड़े की सवारी करते हैं, और तो और गणेश जी का आकर भी बढ़ता रहता है ।जी हा जबलपुर शहर की रतन नगर की पहाड़ियों पर स्थित सुप्तेश्वर गणेश मंदिर में भगवान की स्वयंभू प्रतिमा स्थापित है। करीब 50 फीट की ऊंचाई पर भगवान गणेश की प्रतिमा शिला स्वरूप में हैं। यहां भक्त मनोकामनाओं के लिए अर्जी लगाते हैं मनोकामना पूरी होने पर भगवान गणेश को सिंदूर चढ़ाने की परंपरा है।

इसकी खास बात यह है कि इस में गणेश जी की ये पताकृतिक प्रतिमा लगातार बढ़ रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि 35 सालों में प्रतिमा 5 फीट से भी अधिक बढ़ गई है। जिस समय इसका प्रथम पूजन किया गया था, तब ये 20 फीट की थी और अब बढ़ कर 25 फीट हो गई है। इसके अलावा यह 120 फीट चौड़ी हो गई है। एक किस्से ने अनुसार जबलपुर के गुप्तेश्वर क्षेत्र के रतन नगर में भगवान गणेश सुप्त अवस्था में थे। एक महिला भक्त को भगवन ने दर्शन दिए थे। स्थानीय लोग बताते है की शहर की राइट टाउन निवासी श्रीमती सुधा राजे को साल 1985 में एक सपना आया और भगवान ने प्रतिमा स्थापना की बात कही। ऐसे सपने करीब 4 साल तक आते रहे थे। इसके बाद यह सपने वाली बात महिला ने अपने पति को बताई, और उन्हें लेकर उस जगह पर गई जहा भगवन जी थे।

बताया जाता ही की जब श्रीमती राजे उस पहाड़ी वाले स्थान पर गई, तो वहां कोई रास्ता नहीं था। पहाड़ी पर ऊँची जगह जाने पर पत्थर पर उठा हुआ उभार दिखाई दिया। इसके बाद 4 सितंबर 1989 को भगवान गणेश को सिंदूर चढ़ा पर पूजा आरम्न्ह की गई। यह किस्सा शहर में लोगो तक पहुंचा तो यहां भक्तों का ताँता लग गया। लोग यहां पूजा कर मन्नतें मांगने आया करते थे। लोगों की मन्नत पूरी होती गई और यहां आने वाले भक्तों की संख्या भी साल दर साल बढ़ती गई। भक्त यहां मनोकामनाओं के लिए अर्जी लगाते हैं। भगवान गणेश का वाहन चूहा है लेकिन सुप्तेश्वर गणेश मंदिर में स्थित प्रतिमा में वे घोड़े पर सवार हैं। यहां स्थित भगवान गणेश की प्रतिमा काफी विशाल है, कहा जाता है कि प्रतिमा पाताल तक समाई है। सिर्फ भगवान गणेश की विशाल सूंड धरती के बाहर नजर आती है, जबकि शेष शरीर धरती के अंदर है।  ऐसा कहा जाता है की भगवान गणेश सुप्त अवस्था में थे, इसीलिए इनका नाम सुप्तेश्वर गणेश रखा गया।

मान्यता है कि भगवान गणेश की 40 दिन नियमित पूजा अर्चना करने वाले भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं। मनोकामना पूरी होने के बाद लोग दर्शन-अनुष्ठान करते हैं। जो सिंदूर चढ़ाने की अर्जी लगाते हैं, वे लोग सिंदूर चढ़ाते हैं।

आपको बता दे कि सुप्तेश्वर गणेश मंदिर में कोई गुंबद या दीवार नहीं है। यहां भगवान गणेश की प्रतिमा स्वयंभू है। भक्तों को प्राकृतिक पहाड़ी में जिस स्वरूप में भगवान हैं उसी स्वरूप में पूजा करने का अवसर मिलता है।  गणेशोत्सव में प्रत्येक दिन सुबह धार्मिक अनुष्ठान एवं शाम को महाआरती की जाती है। साल भर में मंदिर में तीन माह में एक बार सिंदूर चढ़ाने की रस्म अदा की जाती है। इसके अलावा गणेश चतुर्थी से 11 दिन गणेशोत्सव में विशेष पूजा अर्चना की जाती है। प्रत्येक माह गणेश चतुर्थी को महाआरती की जाती है, वहीं, श्रीराम नवमीं एवं श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव पर भी मंदिर में विशेष पूजा का विधान है।

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