सोशल संवाद/डेस्क: राज्य में अनधिकृत रूप से बने भवनों के मालिकों को राज्य सरकार ने बड़ी राहत दी है. नगर विकास एवं आवास विभाग ने झारखंड अनधिकृत निर्मित भवन नियमितीकरण नियमावली, 2026 को अधिसूचित कर दिया है. इसके तहत 31 दिसंबर 2024 से पहले बने अवैध निर्माणों को निर्धारित शर्तों के साथ वैध कराया जा सकेगा. यह नियम राज्य की सभी नगरपालिकाओं, क्षेत्रीय विकास प्राधिकरणों (जैसे आरआरडीए) और औद्योगिक नगरों में लागू होगा.
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नियमावली के अनुसार, भवन मालिकों को अधिसूचना जारी होने की तिथि 27 अप्रैल 2026 से 60 दिनों के भीतर बीपीएएमएस पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन करना होगा. आवेदन के साथ कुल नियमितीकरण शुल्क का 50 प्रतिशत जमा करना अनिवार्य है. जो भवन मालिक इस योजना के तहत आवेदन नहीं करेंगे, उनके निर्माण को सतत अपराध माना जायेगा. ऐसे मामलों में जुर्माना लगाने के साथ ही प्रशासन द्वारा बुलडोजर चलाकर निर्माण ध्वस्त करने की कार्रवाई की जा सकती है.
नियमितीकरण नियमावली
- अधिसूचना जारी : 31 दिसंबर 2024 से पहले बने अवैध निर्माणों को शर्तों के साथ वैध कराया जा सकेगा
- विभिन्न श्रेणियों के लिए शुल्क तय
- आवेदन बीपीएएमएस पोर्टल के माध्यम से करना होगा, इसके साथ कुल शुल्क का 50 प्रतिशत जमा करना जरूरी
- 10 मीटर ऊंचाई और 300 वर्ग मीटर तक के भवन ही पात्र, सरकार ने खोला नियमितीकरण विंडो
- आवासीय भवन के लिए न्यूनतम शुल्क 10,000 रुपये तय
- गैर-आवासीय भवन के लिए 20,000 रुपये शुल्क निर्धारित
- निकाय गठन से पहले बने भवनों के लिए 5,000 रुपये एकमुश्त शुल्क
इन निर्माणों को नहीं मिलेगी राहत
सरकार ने स्पष्ट किया है कि कुछ श्रेणियों के अवैध निर्माणों को नियमित नहीं किया जायेगा. इनमें सरकारी, पीएसयू या वक्फ बोर्ड की जमीन पर अतिक्रमण, मास्टर प्लान, सड़क एलाइनमेंट या एलआरटीएस क्षेत्र में आने वाले भवन शामिल हैं. इसके अलावा तालाब, नदी और जलग्रहण क्षेत्र में निर्माण, असुरक्षित घोषित भवन तथा सीएनटी और एसपीटी एक्ट का उल्लंघन कर बने भवन भी इसमें शामिल हैं.
दस्तावेज व तकनीकी शर्तें
आवेदन के लिए फॉर्म-ए, फॉर्म-बी (शपथ पत्र), फॉर्म-सी (स्ट्रक्चरल सेफ्टी सर्टिफिकेट) और स्वामित्व के दस्तावेज अनिवार्य होंगे. इसके साथ भवन के नवीनतम फोटो, नक्शा, साइट प्लान और अन्य तकनीकी विवरण देना होगा. आवेदन केवल निबंधित एलटीपी (लाइसेंस्ड टेक्निकल पर्सन) के माध्यम से ही किया जा सकेगा. गैर-आवासीय भवनों के लिए अग्निशमन विभाग सहित आवश्यक एनओसी भी देना होगा. यदि भवन में वर्षा जल संचयन प्रणाली नहीं है, तो छह महीने के भीतर इसे लगाने का शपथ पत्र देना होगा.









