February 24, 2024 10:43 am

सांसद एवं पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने आज ‘भारत जोड़ो न्याय यात्रा’ के दौरान पूर्णिया, बिहार में जनसभा को संबोधित किया

सोशल संवाद/दिल्ली( रिपोर्ट – सिद्धार्थ प्रकाश ) : राहुल गांधी ने विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए कहा – भूपेश बघेल जी, अखिलेश सिंह जी, शकील अहमद खान जी, मदन मोहन झा जी, तारिक अनवर जी, इमरान प्रतापगढ़ी जी, कन्हैया कुमार जी, मोहम्मद जावेद जी, अहमद अशफाक करीम जी, अलायंस के नेता दीपांकर भट्टाचार्य जी, महबूब आलम जी, कुणाल जी, स्टेज पर कांग्रेस पार्टी के सब वरिष्ठ नेता, भाईयो और बहनो, प्रेस के हमारे मित्रो, आप सबका यहाँ बहुत-बहुत स्वागत, नमस्कार।

अभी जब अखिलेश जी का भाषण चल रहा था, तो बघेल जी ने मुझे एक चुटकुला सुनाया। आपके स्टेट के, आपके चीफ मिनिस्टर के बारे में चुटकुला है, मैं सुना देता हूं आपको, सुनना है (जनसभा ने कहाँ- हाँ सुनना है)। तो आपके चीफ मिनिस्टर गवर्नर के यहाँ स्वियरिंग के लिए गए, बड़ा धूमधाम था, वहाँ पर बीजेपी के नेता बैठे थे। गवर्नर साहब बैठे थे, सब एमएलए बैठे थे, स्वियरिंग होती है। शपथ लेते हैं चीफ मिनिस्टर की। उनके मंत्री, दो-तीन मंत्री भी शपथ लेते हैं, खूब तालियां बजती हैं और फिर नीतीश जी निकल जाते हैं, वापस सीएम हाउस की ओर चले जाते हैं। गाड़ी में पता लगता है कि वो अपना शॉल गवर्नर के घर में छोड़ आए, तो ड्राइवर से कहते हैं भईया, चलो, वापस चलो, शॉल उठाना है। तो ड्राइवर गाड़ी घुमाता है। गवर्नर के घर आता है, नीतीश जी निकलते हैं, गवर्नर के पास जाते हैं, दरवाजा खोलते हैं। गवर्नर कहते हैं भाई, इतनी जल्दी वापस आ गए!

अब बात समझिए, नीतीश जी कहाँ फंसे, मैं आपको बताता हूं। मैंने नीतीश जी से साफ कह दिया कि देखिए, आपको जाति जनगणना बिहार में करनी पड़ेगी, हम आपको छूट नहीं देंगे और आरजेडी ने-हमने ये काम नीतीश जी पर दबाव डालकर किया। अब क्या हुआ, अब दूसरी साइड से प्रैशर आया, बीजेपी नहीं चाहती कि इस देश का एक्सरे हो, डरते हैं एक्सरे से। दूध का दूध, पानी का पानी हो जाएगा। पता लग जाएगा कि कितने ओबीसी हैं, कितने दलित हैं, कितने आदिवासी हैं। बीजेपी ये नहीं चाहती। बीजेपी चाहती है कि आपका इधर ध्यान जाए, उधर ध्यान जाए, आगे-पीछे ध्यान जाता जाए, मगर सामाजिक न्याय पर गलती से भी आपका ध्यान ना चला जाए। नीतीश जी बीच में फंस गए और बीजेपी ने उन्हें निकलने का रास्ता दे दिया और नीतीश जी उस रास्ते पर निकल गए।

डेढ़ लाख रुपए के लिए ये अमेरिका में बिकता है और यहाँ पर हमारे किसान को 250 रुपए प्रति किलो, 2500 रुपए दस किलो के लिए। मैं आपसे पूछना चाहता हूं, ये पैसा जा कहाँ रहा है, ये जा कहाँ रहा है, किसके हाथ में जा रहा है? ये किसान के हाथ में तो नहीं जा रहा ना। तो ये देखिए, इसको कहते हैं आर्थिक अन्याय और ये हर चीज में हो रहा है।  तो ये दो बातें मैं आपसे कहना चाहता था। एक – किसकी कितनी आबादी है, ओबीसी कितने, दलित कितने, आदिवासी कितने और उनमें से कितने गरीब हैं, कितनों के पास सरकारी नौकरी है, कितने कंपनी में काम कर रहे हैं, देश का एक्सरे और दूसरा बहुत महत्वपूर्ण सवाल – डेढ़ लाख रुपए की माला में से हमारे किसान को ढाई हजार, तीन हजार रुपए क्यों मिल रहे हैं, ज्यादा क्यों नहीं मिल रहे हैं? यही दो सवाल हैं हिंदुस्तान के सामने, बाकी सब आपके ध्यान को इधर-उधर करने की बात है। अब आप कहोगे कि इसमें बिहार का क्या रोल है, बिहार को क्या करना है? हजारों साल से ये प्रदेश इस देश को सामाजिक न्याय और आर्थिक न्याय दिखा रहा है। सोशल मूवमेंट होती है, देश जागता है, तो बिहार से जागता है।

भाईयो और बहनो, पिछले साल हमने भारत जोड़ो यात्रा की। कन्याकुमारी से हम कश्मीर तक चले। समुद्र के तट से शुरु की, चलते गए, चलते गए, चलते गए, हिमालय तक चले। आप सब हमारे साथ चले थे। बीजेपी देश में नफरत और हिंसा फैला रही है। इनका लक्ष्य यही है कि आप हिंसा में, नफरत में उलझे रहो, एक भाई दूसरे से लड़े और आप आर्थिक और सामाजिक न्याय की बात मत करो और भारत जोड़ो यात्रा ने देश में एक नया रास्ता दिखाया। यात्रा में बिहार के लोग हमारे साथ चले, बंगाल के लोग चले और आपने हमें कहा देखिए, आप कन्याकुमारी से कश्मीर जा रहे हो, बिहार, बंगाल, उत्तर प्रदेश, इसमें से आप यात्रा क्यों नहीं कर रहे हो? बात बिल्कुल सही थी। इसलिए हमने मणिपुर से भारत जोड़ो न्याय यात्रा शुरू की।

जहाँ भी हम गए हैं, वहाँ बिहार के युवा, माताएं-बहने, किसान, मजदूर, छोटे दुकानदार, सबने यात्रा को समर्थन दिया, अपनी पूरी की पूरी शक्ति यात्रा को दी और जितनी भी मोहब्बत दे सकते थे, आपने हमें दिया। इसके लिए मैं आपको दिल से धन्यवाद करना चाहता हूं और अंत में आपसे कहना चाहता हूं कि सामाजिक न्याय और आर्थिक न्याय से बड़ी कुछ बात नहीं है। यही है, हिंदुस्तान का भविष्य अगर आप अच्छा चाहते हैं तो आर्थिक न्याय और सामाजिक न्याय हिंदुस्तान की जनता को देना ही पड़ेगा।

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