सोशल संवाद/डेस्क : कांग्रेस पार्टी अप्रैल माह को “सामाजिक न्याय माह” के रूप में मना रही है। इसी कड़ी में पार्टी ने जानकारी दी है कि 11 अप्रैल को लखनऊ स्थित इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में ज्योतिबा फुले जयंती मनाई जाएगी और 12 अप्रैल को नई दिल्ली में “रन फॉर अंबेडकर, रन फॉर कॉन्स्टिट्यूशन” नामक सामाजिक परिवर्तन मैराथन का आयोजन किया जाएगा।
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नई दिल्ली स्थित कांग्रेस कार्यालय में पत्रकार वार्ता करते हुए पार्टी के अनुसूचित जाति विभाग के अध्यक्ष राजेंद्र पाल गौतम ने बताया कि अप्रैल का महीना ज्योतिबा फुले, बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर, राहुल सांकृत्यायन, बाबू जगजीवन राम और सम्राट अशोक जैसे देश के कई महानायकों की जयंती के कारण विशेष महत्व रखता है।
उन्होंने बताया कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अनुसूचित जाति विभाग और ओबीसी विभाग द्वारा 11 अप्रैल को उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ स्थित इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में ज्योतिबा फुले जी की जयंती मनाई जाएगी। इस कार्यक्रम में जाति जनगणना की आवश्यकता पर चर्चा की जाएगी। उन्होंने कहा कि जाति जनगणना से सरकार को पिछड़े और अति पिछड़े वर्गों की समस्याओं के समाधान के लिए नीतियां बनाने में मदद मिलेगी।
इसके अलावा दोनों विभागों द्वारा 12 अप्रैल को नई दिल्ली में “रन फॉर अंबेडकर, रन फॉर कॉन्स्टिट्यूशन” नामक सामाजिक परिवर्तन मैराथन का आयोजन किया जाएगा। यह मैराथन सुबह छह बजे मंडी हाउस से शुरू होगी।
उन्होंने बताया कि इस मैराथन का शुभारंभ लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी करेंगे और भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान मोहम्मद अजहरुद्दीन समेत अन्य कांग्रेस नेता भी इसमें शामिल होंगे। उन्होंने बताया कि अब तक 7,000 से अधिक लोग इस मैराथन के लिए पंजीकरण करा चुके हैं और प्रतिभागियों की कुल संख्या लगभग 15,000 होने की उम्मीद है।
प्रतियोगिता में विजेताओं के लिए नकद पुरस्कार की घोषणा भी की गई है। पहले स्थान पर आने वाले को 50,000 रुपये, दूसरे स्थान पर 25,000 रुपये और तीसरे स्थान पर आने वाले को 15,000 रुपये दिए जाएंगे। इसके अलावा चौथे से 20वें स्थान तक आने वाले प्रतिभागियों को 1,000-1,000 रुपये दिए जाएंगे। साथ ही हिस्सा लेने वाले सभी प्रतिभागियों को टी-शर्ट, मेडल और प्रमाणपत्र प्रदान किए जाएंगे।
गौतम ने कहा कि “रन फॉर अंबेडकर, रन फॉर कॉन्स्टिट्यूशन” का संदेश बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर द्वारा लिखे गए संविधान के महत्व को रेखांकित करता है। उन्होंने कहा कि यह दौड़ सामाजिक परिवर्तन की मैराथन है और संविधान, सामाजिक न्याय व समानता के मूल्यों को समर्पित है। मैराथन का मुख्य उद्देश्य उस संविधान के प्रति एकजुटता दिखाना है जिसने सदियों की गुलामी और विषमता को खत्म कर दलितों, पिछड़ों, आदिवासियों और महिलाओं को समानता का अधिकार दिया। उन्होंने आम जनता से इसमें बढ़-चढ़कर भाग लेने की अपील की।









