सुप्रीम कोर्ट बोला- बच्चों को इंटरनेट से दूर रखना बेतुका:बाल यौन शोषण कंटेंट हटाने के लिए डेटाबेस बने

By Tamishree Mukherjee

Published :

Follow
Supreme Court says keeping children away from the internet is absurd

Join WhatsApp

Join Now

 सोशल संवाद/डेस्क : सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि इंटरनेट का इस्तेमाल करना हर व्यक्ति, यहां तक कि बच्चों का भी मौलिक अधिकार है। बच्चों को इंटरनेट से पूरी तरह दूर रखना बेतुका होगा। कोर्ट ने कहा कि बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा और उनकी आजादी, दोनों का ध्यान रखना जरूरी है।

यह भी पढ़े : सड़क नहीं सुधरी तो धरने पर बैठेंगे जजः सुप्रीम कोर्ट

कोर्ट ने कहा- इंटरनेट पर गलत कंटेंट होने के कारण बच्चों के लिए इस पर पूरी तरह पाबंदी लगाना सही नहीं है। ऐसी रोक से बच्चे कम सुरक्षित वेबसाइटों और प्लेटफॉर्म पर जा सकते हैं। ऑनलाइन धमकी या शोषण का सामना करने वाले बच्चे शिकायत करने से भी डर सकते हैं।

कोर्ट ने बच्चों के यौन शोषण और दुर्व्यवहार से जुड़े ऑनलाइन कंटेंट (CSEAM) को पहचानने और हटाने की व्यवस्था मजबूत करने के लिए केंद्र को नेशनल डेटाबेस बनाने का निर्देश दिया है। सोशल मीडिया कंपनियों को भी ऐसा कंटेंट हटाने के दो घंटे के भीतर पुलिस या साइबर क्राइम पोर्टल को रिपोर्ट देनी होगी।

5 साल में बच्चों की अश्लील सामग्री से जुड़े मामले 26.6 गुना बढ़े गृह मंत्रालय की ओर से 29 जुलाई 2025 को लोकसभा में पेश NCRB के आंकड़ों के मुताबिक, बच्चों की अश्लील तस्वीरों और वीडियो से जुड़े मामले 2018 में 44 थे, जो 2022 में बढ़कर 1,171 हो गए।
यानी 26.6 गुना बढ़े। वहीं, बच्चों के खिलाफ दर्ज साइबर अपराध के मामले 2018 में 232 थे, जो 2022 में बढ़कर 1,823 हो गए। हालांकि, केंद्र ने 2022 के बाद का डेटा रिलीज नहीं किया।

YouTube Join Now
Facebook Join Now
Social Samvad MagazineJoin Now
---Advertisement---

संबंधित पोस्ट

Exit mobile version