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  • Meerut Illegal Construction: सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश, 859 अवैध निर्माण गिराने के निर्देश

    Meerut Illegal Construction: सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश, 859 अवैध निर्माण गिराने के निर्देश

    सोशल संवाद/डेस्क: Supreme Court of India ने Meerut के शास्त्री नगर क्षेत्र में अवैध निर्माण को लेकर सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने 859 संपत्तियों में सेटबैक क्षेत्र में हुए अवैध निर्माण को दो महीने के भीतर ध्वस्त करने का आदेश दिया है। अदालत ने स्पष्ट कहा कि यह मामला केवल उत्तर प्रदेश नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए एक चेतावनी है।

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    जस्टिस JB Pardiwala और KV Viswanathan की पीठ ने कहा कि कानून का शासन किसी भी दबाव में नहीं झुक सकता। कोर्ट ने 44 संपत्तियों (सेंट्रल मार्केट) के व्यावसायिक उपयोग पर रोक लगाते हुए उन्हें सील करने का निर्देश दिया था, जिस पर प्रशासन ने कार्रवाई पूरी कर ली है।

    सीलिंग में स्कूल, अस्पताल और बैंक भी शामिल

    सील की गई संपत्तियों में स्कूल, अस्पताल, बैंक्वेट हॉल, राष्ट्रीयकृत बैंक और एनबीएफसी शामिल हैं। कोर्ट ने इस पर नाराजगी जताते हुए कहा कि लोगों की जान से बढ़कर कोई व्यावसायिक गतिविधि नहीं हो सकती।

    अवैध निर्माण पर सख्त कार्रवाई के निर्देश

    कोर्ट ने प्रशासन को निर्देश दिया है कि पहले नोटिस जारी किया जाए और 10–15 दिन का समय दिया जाए। इसके बाद भी अवैध निर्माण नहीं हटाने पर प्रशासन खुद ध्वस्तीकरण करेगा और खर्च संबंधित लोगों से वसूला जाएगा।

    प्रशासन की लापरवाही पर टिप्पणी

    अदालत ने माना कि प्रशासन की लापरवाही के कारण ही इतने बड़े पैमाने पर अवैध निर्माण हुए। अब सख्त कार्रवाई जरूरी है ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति न बने।

    मेरठ बंद का असर

    कार्रवाई के विरोध में व्यापारियों ने मेरठ बंद का आह्वान किया। बाजार, पेट्रोल पंप, डेयरी, मेडिकल स्टोर और अन्य प्रतिष्ठान बंद रहे। व्यापारियों ने अधिकारियों पर कोर्ट को गुमराह करने का आरोप लगाया।

    अगली सुनवाई जुलाई में

    कोर्ट ने प्रशासन से विस्तृत रिपोर्ट और तस्वीरें जमा करने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई जुलाई में होगी, जिसमें कार्रवाई की प्रगति की समीक्षा की जाएगी।

  • गैस बुकिंग घटकर हुई आधी, अब डिजिटल बुकिंग अनिवार्य

    गैस बुकिंग घटकर हुई आधी, अब डिजिटल बुकिंग अनिवार्य

    सोशल संवाद/डेस्क: अमेरिका द्वारा सीज फायर की घोषणा का सीधा और सकारात्मक असर घरेलू गैस की बुकिंग पर देखने को मिला है. बुधवार को इंडियन ऑयल के महज साढ़े सात हजार ग्राहकों ने गैस की बुकिंग करायी, जबकि इससे पहले यह आंकड़ा प्रतिदिन 17 से 18 हजार तक पहुंच रहा था. विभाग ने इस वर्तमान स्थिति को एक ‘साधारण प्रैक्टिस’ बताया है.

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    डिजिटल बुकिंग के बिना नहीं मिलेगा सिलेंडर

    इंडियन ऑयल के अधिकारियों ने इस राहत के बीच व्यवस्था को और पारदर्शी बनाने के लिए सभी डिस्ट्रीब्यूटरों को कड़े निर्देश जारी किये हैं. अब गैस की बुकिंग 100 प्रतिशत डिजिटल तरीके से ही सुनिश्चित की जायेगी. ग्राहकों को मोबाइल पर प्राप्त ओटीपी (वन टाइम पासवर्ड) दिखाने पर ही भरा हुआ सिलेंडर दिया जायेगा. अधिकारियों ने स्पष्ट कर दिया है कि मैनुअल या कागज पर लिखकर की गयी किसी भी प्रकार की बुकिंग अब स्वीकार नहीं होगी.

    यदि कोई डिस्ट्रीब्यूटर इन नियमों का उल्लंघन करता है, तो उसके खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जायेगी. गैस वितरण और आगामी रणनीति को लेकर गुरुवार को एक महत्वपूर्ण राज्य स्तरीय बैठक बुलायी गयी है. इसमें सभी जिलों के जिला आपूर्ति पदाधिकारियों को आमंत्रित किया गया है.

  • चाईबासा में ट्यूशन से लौटती युवती पर चाकू से 12 वार, गंभीर हालत में जमशेदपुर रेफर

    चाईबासा में ट्यूशन से लौटती युवती पर चाकू से 12 वार, गंभीर हालत में जमशेदपुर रेफर

    सोशल संवाद/डेस्क: चाईबासा के मुफस्सिल थाना क्षेत्र अंतर्गत कल्याणपुर स्थित गुटुसाईं आनंद मार्ग स्कूल गली में देर रात एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई, जहां एक अज्ञात युवक ने ट्यूशन पढ़ाकर घर लौट रही युवती पर पीछे से हमला करते हुए उस पर चाकू से बेरहमी से कई वार किए, जिससे वह गंभीर रूप से घायल होकर सड़क पर गिर पड़ी।

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    घायल युवती की पहचान शिल्पी मोदक के रूप में हुई है, जो न्यू कॉलोनी नीमडीह की रहने वाली है और अपने परिवार की आर्थिक मदद के लिए ट्यूशन पढ़ाती थी। बताया जा रहा है कि हमलावर ने युवती की पीठ और हाथ पर करीब 12 बार चाकू से वार किया और उसे मृत समझकर मौके से फरार हो गया। राहगीरों की मदद से उसे तत्काल सदर अस्पताल पहुंचाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उसकी नाजुक हालत को देखते हुए बेहतर इलाज के लिए जमशेदपुर रेफर कर दिया गया है।

    घटना के बाद इलाके में दहशत फैल गई है और स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है, वहीं पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और आरोपी की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी कर रही है, हालांकि अभी तक हमलावर की पहचान स्पष्ट नहीं हो सकी है।

  • ट्रंप की युद्ध चेतावनी के बीच ईरान की चाल से बदला खेल, 2 हफ्ते का सीजफायर तय

    ट्रंप की युद्ध चेतावनी के बीच ईरान की चाल से बदला खेल, 2 हफ्ते का सीजफायर तय

    सोशल संवाद/डेस्क: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव उस वक्त चरम पर पहुंच गया जब डोनाल्ड ट्रंप ने कड़ी चेतावनी देते हुए संकेत दिया कि एक बड़ी कार्रवाई होने वाली है, जिससे पूरी सभ्यता को नुकसान पहुंच सकता है। हालात ऐसे बन गए थे कि सैन्य टकराव लगभग तय माना जा रहा था, लेकिन ऐन वक्त पर ईरान की एक रणनीति ने पूरा समीकरण बदल दिया।

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    सूत्रों के मुताबिक, संभावित हमले से बचने के लिए ईरान ने अपने महत्वपूर्ण ठिकानों और पावर प्लांट्स के आसपास बड़ी संख्या में युवाओं को तैनात कर दिया। इस कदम को ‘ह्यूमन शील्ड’ के तौर पर देखा गया, जिस पर ट्रंप ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए इसे गैरकानूनी और बेईमानी बताया। उनका कहना था कि आम नागरिकों को इस तरह इस्तेमाल करना अंतरराष्ट्रीय नियमों के खिलाफ है।

    इसी बीच Pakistan ने कूटनीतिक पहल करते हुए अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता की कोशिश की। इस्लामाबाद ने दोनों देशों को 2 हफ्तों के सीजफायर का प्रस्ताव भेजा, ताकि बातचीत के जरिए समाधान निकाला जा सके। शुरुआत में ट्रंप ने इस पर सीधी प्रतिक्रिया देने से बचते हुए कहा कि मामला अभी बेहद संवेदनशील दौर में है।

    हालांकि, कई घंटों की बातचीत के बाद अमेरिका ने इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया और ईरान के साथ सीजफायर को 2 हफ्तों के लिए बढ़ा दिया गया। दोनों पक्ष अब 10 सूत्रीय प्रस्ताव के आधार पर आगे शांति वार्ता जारी रखने पर सहमत हुए हैं। फिलहाल टकराव टल गया है, लेकिन हालात अब भी नाजुक बने हुए हैं।

  • Hormuz पर टकराव से अटकी ईरान-अमेरिका डील, ट्रंप ने टोल और ताकत दोनों का दिया संकेत

    Hormuz पर टकराव से अटकी ईरान-अमेरिका डील, ट्रंप ने टोल और ताकत दोनों का दिया संकेत

    सोशल संवाद/डेस्क: ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव अब सिर्फ जंग तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसका सबसे बड़ा केंद्र बन गया है Strait of Hormuz, यही वह अहम समुद्री रास्ता है, जहां से दुनिया की बड़ी मात्रा में तेल और गैस की सप्लाई होती है। ईरान ने इस पर अपना नियंत्रण मजबूत करते हुए इसे बंद कर रखा है, जिससे वैश्विक स्तर पर असर दिखने लगा है। अमेरिका इस रास्ते को खुलवाने की कोशिश में लगा है, लेकिन लगातार नाकामी के चलते दोनों देशों के बीच शांति वार्ता भी अटक गई है।

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    इस बीच अमेरिकी नेता Donald Trump ने होर्मुज को लेकर एक नया प्रस्ताव सामने रखा है। उन्होंने सुझाव दिया है कि भविष्य में इस रास्ते से गुजरने वाले जहाजों पर अमेरिका टोल वसूल सकता है। हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि इस व्यवस्था को कैसे लागू किया जाएगा, क्योंकि क्षेत्र में तनाव लगातार बढ़ रहा है। ट्रंप के बयान से यह भी संकेत मिला है कि अमेरिका चाहता है कि होर्मुज स्ट्रेट किसी एक देश के नियंत्रण में न रहे, बल्कि इसमें उसकी भी हिस्सेदारी हो।

    ट्रंप ने यह भी कहा कि अमेरिकी सेना के पास इतनी क्षमता है कि जरूरत पड़ने पर वह बेहद कम समय में ईरान के अहम ढांचे को नुकसान पहुंचा सकती है। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि अमेरिका का मकसद तबाही नहीं है और अगर हालात सामान्य होते हैं तो वह ईरान के पुनर्निर्माण में सहयोग भी कर सकता है। इससे साफ है कि अमेरिका एक तरफ दबाव की रणनीति अपना रहा है, तो दूसरी तरफ बातचीत का रास्ता भी खुला रखना चाहता है।

    गौरतलब है कि 28 फरवरी 2026 से शुरू हुए इस संघर्ष में हालात तब और गंभीर हो गए, जब हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर Ali Khamenei की मौत हो गई। इसके बाद से ईरान ने जवाबी कदम उठाते हुए होर्मुज को बंद कर दिया, जो अब पूरी दुनिया के लिए चिंता का कारण बन चुका है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या होर्मुज स्ट्रेट इस टकराव को खत्म करने की चाबी बनेगा या फिर यही आगे भी संघर्ष की सबसे बड़ी वजह बना रहेगा।

  • ढाई साल बाद खत्म हुआ ज्योति-आलोक विवाद, साथ रहने का फैसला; नई शुरुआत से बदली कहानी

    ढाई साल बाद खत्म हुआ ज्योति-आलोक विवाद, साथ रहने का फैसला; नई शुरुआत से बदली कहानी

    सोशल संवाद/डेस्क: कभी सोशल मीडिया से लेकर सियासी गलियारों तक सुर्खियों में रहा ज्योति मौर्या और उनके पति आलोक मौर्या का विवाद अब सुलझ गया है। करीब ढाई साल तक चले आरोप-प्रत्यारोप, शिकायतों और जांच के बाद दोनों ने एक बार फिर साथ रहने का फैसला किया है। इस नई शुरुआत के साथ उनकी जिंदगी धीरे-धीरे सामान्य पटरी पर लौटती दिख रही है, जिससे दोनों परिवारों को भी बड़ी राहत मिली है।

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    ताजा जानकारी के अनुसार, ज्योति मौर्या को प्रमोशन के बाद नोएडा में नई पोस्टिंग मिली है और आलोक मौर्या भी उनके साथ रह रहे हैं। इस बीच आलोक अपने करियर पर ध्यान देते हुए प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में जुटे हैं और हाल ही में यूपी पीसीएस इंटरव्यू तक भी पहुंचे थे। हालांकि अंतिम सूची में उनका नाम नहीं आ सका।

    अगर इस विवाद की शुरुआत पर नजर डालें, तो साल 2010 में दोनों की शादी के बाद सब कुछ सामान्य था, लेकिन 2015 में ज्योति मौर्या के प्रशासनिक सेवा में आने के बाद रिश्तों में दूरी बढ़ने लगी। धीरे-धीरे मामला आरोपों, शिकायतों और जांच तक पहुंच गया। आलोक मौर्या ने भ्रष्टाचार और निजी जीवन से जुड़े गंभीर आरोप लगाए, जिसके बाद जांच भी शुरू हुई, लेकिन बाद में उन्होंने अपनी शिकायत वापस ले ली और मामला खत्म कर दिया गया।

    यह पूरा घटनाक्रम सोशल मीडिया पर भी खूब चर्चा में रहा, जहां दोनों पक्षों को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आईं। अब परिवार और करीबी लोगों की पहल के बाद दोनों के बीच संवाद शुरू हुआ और मतभेद खत्म होते गए। अंततः उन्होंने साथ रहने का निर्णय लिया, जिसे एक परिपक्व और सकारात्मक कदम के रूप में देखा जा रहा है।

  • जर्मनी का बड़ा फैसला: 17-45 पुरुषों की विदेश यात्रा पर रोक, अब सेना से लेनी होगी अनुमति

    जर्मनी का बड़ा फैसला: 17-45 पुरुषों की विदेश यात्रा पर रोक, अब सेना से लेनी होगी अनुमति

    सोशल संवाद/डेस्क : यूरोप के प्रमुख देश जर्मनी ने अपनी सुरक्षा नीति को लेकर एक बड़ा और सख्त फैसला लिया है, जिसने वैश्विक स्तर पर चर्चा छेड़ दी है। सरकार ने 17 से 45 वर्ष के पुरुषों के लिए विदेश यात्रा से जुड़ा नया नियम लागू किया है, जिसके तहत अब लंबी अवधि के लिए देश छोड़ने से पहले विशेष अनुमति लेना अनिवार्य होगा।

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    नई व्यवस्था के अनुसार, यदि इस आयु वर्ग का कोई भी पुरुष तीन महीने से अधिक समय के लिए विदेश जाना चाहता है, तो उसे जर्मन सेना यानी बुंडेसवेहर से अनुमति प्राप्त करनी होगी। यह नियम 1 जनवरी 2026 से प्रभावी होगा और इसे सामान्य परिस्थितियों में भी लागू किया जा रहा है, जबकि पहले ऐसा प्रावधान केवल आपातकाल या युद्ध की स्थिति में ही होता था।

    सरकार का मानना है कि यह कदम देश की सैन्य तैयारियों को मजबूत करने की दिशा में जरूरी है। दरअसल, जर्मनी आने वाले वर्षों में अपनी सेना का विस्तार करना चाहता है। वर्तमान में सेना में लगभग 1.84 लाख सैनिक हैं, जिसे बढ़ाकर 2035 तक करीब 2.55 से 2.70 लाख तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है। ऐसे में सरकार चाहती है कि संभावित सैनिकों का पूरा रिकॉर्ड उसके पास उपलब्ध रहे, ताकि जरूरत पड़ने पर उन्हें तुरंत शामिल किया जा सके।

    इस नई नीति का एक और अहम पहलू यह है कि 2008 या उसके बाद जन्मे युवाओं को सेना से जुड़ी एक रुचि फॉर्म भरना होगा। यह फॉर्म पुरुषों के लिए अनिवार्य किया गया है, जबकि महिलाओं के लिए इसे वैकल्पिक रखा गया है। इस कदम के जरिए सरकार युवाओं को भविष्य की सैन्य जरूरतों के लिए तैयार रखना चाहती है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय यूरोप में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच लिया गया है। नाटो के सदस्य के रूप में जर्मनी की भूमिका क्षेत्रीय सुरक्षा में बेहद अहम है, और ऐसे में अपनी रक्षा क्षमता को मजबूत करना उसकी प्राथमिकता बन गई है।

    हालांकि, इस फैसले को लेकर आलोचनाएं भी सामने आ रही हैं। कई लोग इसे नागरिक स्वतंत्रता पर अंकुश के रूप में देख रहे हैं। उनका कहना है कि सामान्य परिस्थितियों में इस तरह का प्रतिबंध लगाना व्यक्तिगत अधिकारों का उल्लंघन हो सकता है।

    कुल मिलाकर, जर्मनी का यह नया नियम उसकी बदलती सुरक्षा रणनीति और सैन्य दृष्टिकोण को दर्शाता है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह नीति देश की सुरक्षा जरूरतों को कितना मजबूत करती है और नागरिकों के अधिकारों के साथ किस तरह संतुलन बनाती है।

  • राघव चड्ढा बोले- आवाज दबाने की कोशिश, AAP पर उठाए सवाल, विपक्ष ने भी साधा निशाना

    राघव चड्ढा बोले- आवाज दबाने की कोशिश, AAP पर उठाए सवाल, विपक्ष ने भी साधा निशाना

    सोशल संवाद/डेस्क: राज्यसभा में उपनेता पद से हटाए जाने के बाद आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता राघव चड्ढा ने पार्टी नेतृत्व के खिलाफ खुलकर मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने एक वीडियो जारी कर अपनी पीड़ा जाहिर करते हुए कहा कि उनकी आवाज को दबाने की कोशिश की जा रही है। चड्ढा ने भावुक और शायराना अंदाज में कहा कि उनकी खामोशी को उनकी हार न समझा जाए, क्योंकि वक्त आने पर वह अपनी बात मजबूती से रखेंगे।

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    राघव चड्ढा ने कहा कि संसद में जब भी उन्हें बोलने का मौका मिला, उन्होंने हमेशा आम जनता से जुड़े मुद्दों को उठाया। उन्होंने सवाल किया कि क्या जनता की समस्याओं को उठाना कोई अपराध है। उनके मुताबिक, पार्टी की ओर से राज्यसभा सचिवालय को यह सूचना दी गई है कि उन्हें संसद में बोलने का अवसर न दिया जाए, जो लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। उन्होंने यह भी कहा कि वह समझ नहीं पा रहे हैं कि आखिर उनके बोलने से पार्टी को क्या नुकसान हो रहा है।

    चड्ढा ने अपने बयान में उन मुद्दों का भी जिक्र किया, जिन्हें उन्होंने संसद में उठाया था। उन्होंने महंगे एयरपोर्ट खाने, जोमैटो डिलीवरी कर्मियों की परेशानियों, टोल प्लाजा शुल्क और बैंक चार्ज जैसे मुद्दों को जनता से जुड़ा बताया। उनका कहना है कि इन विषयों को उठाने से आम लोगों को राहत मिल सकती है, लेकिन इसके बावजूद उन्हें बोलने से रोकने की कोशिश की जा रही है, जो बेहद चिंताजनक है।

    उन्होंने अपने समर्थकों से अपील करते हुए कहा कि वे उनका साथ बनाए रखें, क्योंकि वह हमेशा जनता की आवाज उठाते रहेंगे। चड्ढा ने यह भी संकेत दिया कि वह इस मुद्दे पर पीछे हटने वाले नहीं हैं और समय आने पर अपनी बात और मजबूती से रखेंगे।

    इस पूरे घटनाक्रम के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया है। भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस सहित कई विपक्षी दलों ने आम आदमी पार्टी पर हमला बोला है। बीजेपी नेताओं का कहना है कि अगर किसी सांसद को बोलने से रोका जाता है तो यह लोकतंत्र के खिलाफ है और यह एक तरह की तानाशाही को दर्शाता है। वहीं कांग्रेस ने भी इस फैसले की आलोचना करते हुए कहा कि इस तरह के कदम लोकतांत्रिक परंपराओं को कमजोर करते हैं।

    कुल मिलाकर, राघव चड्ढा का यह बयान न केवल आम आदमी पार्टी के भीतर चल रहे मतभेदों को उजागर करता है, बल्कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा राष्ट्रीय राजनीति में बड़ा विवाद बन सकता है।

  • IPL 2026 में LSG के साथ नई शुरुआत को तैयार अर्जुन तेंदुलकर, ज्यादा मौके मिलने की उम्मीद

    IPL 2026 में LSG के साथ नई शुरुआत को तैयार अर्जुन तेंदुलकर, ज्यादा मौके मिलने की उम्मीद

    सोशल संवाद/डेस्क: अर्जुन तेंदुलकर IPL 2026 में नई टीम लखनऊ सुपर जायंट्स (LSG) के साथ अपने करियर का नया सफर शुरू करने जा रहे हैं। पिछले कई सीजन तक मुंबई इंडियंस का हिस्सा रहने के बाद अब वह नई फ्रेंचाइजी में बेहतर अवसरों की तलाश में हैं। अभी तक उन्होंने LSG के लिए डेब्यू नहीं किया है, लेकिन उम्मीद जताई जा रही है कि इस टीम में उन्हें खुद को साबित करने के ज्यादा मौके मिल सकते हैं।

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    हाल ही में एक पॉडकास्ट बातचीत में अर्जुन ने मुंबई इंडियंस के साथ अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने संकेत दिया कि हर खिलाड़ी की तरह वह भी ज्यादा मौके चाहते थे और लंबे समय तक बेंच पर बैठना किसी को पसंद नहीं होता। साथ ही उन्होंने ‘इम्पैक्ट प्लेयर’ नियम पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि क्रिकेट में पारंपरिक 11 खिलाड़ियों के साथ ही खेलना बेहतर है।

    लखनऊ सुपर जायंट्स की टीम में अर्जुन को लोअर मिडिल ऑर्डर में मौका मिल सकता है, खासकर तब जब टीम का यह हिस्सा थोड़ा कमजोर माना जा रहा है। नंबर 6, 7 या 8 पर बल्लेबाजी करते हुए वह टीम के लिए उपयोगी साबित हो सकते हैं। अर्जुन का मानना है कि टी20 फॉर्मेट में कोई भी टीम किसी को भी हरा सकती है और उनकी टीम के पास अच्छा प्रदर्शन करने का पूरा मौका है।

    आज आईपीएल 2026 के मुकाबले में लखनऊ सुपर जायंट्स का सामना दिल्ली कैपिटल्स से होगा। यह मैच लखनऊ के इकाना स्टेडियम में खेला जाएगा, जहां दोनों टीमें अपने अभियान की जीत के साथ शुरुआत करना चाहेंगी।

  • मतदान से पहले पश्चिम बंगाल को लेकर केंद्र सरकार ने उठाया बड़ा कदम

    मतदान से पहले पश्चिम बंगाल को लेकर केंद्र सरकार ने उठाया बड़ा कदम

    सोशल संवाद /डेस्क : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की तैयारी में सभी पार्टी जुट गईं हैं। मतदान दो चरणों में होना है। इससे पहले केंद्र सरकार और गृह मंत्रालय ने बड़ा कदम उठाया है। केंद्र सरकार और गृह मंत्रालय ने 2400 कंपनियों को पश्चिम बंगाल में तैनात करने का फैसला लिया है। एक कंपनी में आमतौर पर 80–120 जवान होते हैं, यानी कुल मिलाकर लगभग 1.9 लाख से 2.9 लाख सुरक्षा कर्मी तैनात किए जा सकते हैं।

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    तैनाती चरणों में की जा रही है और 17 अप्रैल 2026 तक सभी 2400 कंपनियां पहुंच जाएंगी। अभी तक करीब 480 कंपनियां पहले ही तैनात की जा चुकी हैं। मतदान 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को होनी है। मतगणना 4 मई 2026 को होगी। इस भारी सुरक्षा व्यवस्था के पीछे मुख्य कारण चुनाव के दौरान हिंसा रोकना, संवेदनशील इलाकों में कड़ी निगरानी, फ्री और फेयर चुनाव सुनिश्चित करना है।

    पिछले चुनावों और घटनाओं में राजनीतिक तनाव एवं हिंसा का इतिहास रहा है। मतदान खत्म होते ही लगभग 1700 कंपनियां वापस भेज दी जाएंगी। करीब 200 कंपनियां काउंटिंग (4 मई) तक रहेंगी। 500 कंपनियां लंबे समय तक राज्य में रहेंगी, ताकि पोस्ट-पोल हिंसा रोकी जा सके। यह अब तक की सबसे बड़ी केंद्रीय बलों की तैनाती मानी जा रही है। चुनाव आयोग सुरक्षा को लेकर बेहद सख्त है। मतदान के दौरान हर जिले और संवेदनशील बूथ पर फोर्स की मौजूदगी सुनिश्चित की जा रही है।