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  • रांची से हवाई सफर हुआ महंगा, दिल्ली-मुंबई समेत कई रूट पर टिकट किराया 35% तक बढ़ा

    रांची से हवाई सफर हुआ महंगा, दिल्ली-मुंबई समेत कई रूट पर टिकट किराया 35% तक बढ़ा

    सोशल संवाद/डेस्क : रांची से देश के बड़े शहरों के लिए हवाई यात्रा अब पहले से कहीं ज्यादा महंगी हो गई है। हाल के दिनों में फ्लाइट टिकट की कीमतों में करीब 25 से 35 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। एयरलाइंस कंपनियों द्वारा ईंधन अधिभार बढ़ाने और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की कीमतों में उछाल के कारण यात्रियों को अब पहले से ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं।

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    ट्रैवल एजेंसियों और एयरलाइन सूत्रों के अनुसार, पिछले कुछ सप्ताह में कई प्रमुख रूटों पर टिकट की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हुई है। इसका असर खासकर उन यात्रियों पर ज्यादा पड़ रहा है जो कामकाज या जरूरी कारणों से नियमित रूप से हवाई यात्रा करते हैं।

    प्रमुख शहरों के टिकट हुए महंगे

    ट्रैवल एजेंसियों के मुताबिक, रांची से New Delhi जाने वाली फ्लाइट का किराया इस समय लगभग 12 हजार से 15 हजार रुपये के बीच पहुंच गया है। वहीं Hyderabad के लिए टिकट करीब 10 हजार से 13 हजार रुपये तक मिल रहा है।

    इसी तरह Bengaluru के लिए फ्लाइट टिकट करीब 15 हजार रुपये तक पहुंच चुका है। वहीं Mumbai के लिए यात्रियों को 14 हजार से 16 हजार रुपये तक खर्च करने पड़ रहे हैं। इसके अलावा Kolkata जाने वाली फ्लाइट का किराया भी 8 हजार से 10 हजार रुपये के बीच पहुंच गया है। यात्रा की तारीख और सीट उपलब्धता के आधार पर इन किरायों में और भी उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है।

    एयरलाइंस ने जोड़ा अतिरिक्त फ्यूल चार्ज

    टिकट महंगे होने की एक बड़ी वजह एयरलाइंस कंपनियों द्वारा लगाया गया अतिरिक्त फ्यूल सरचार्ज है। हाल ही में Air India और Air India Express ने हर घरेलू उड़ान की टिकट पर 399 रुपये का अतिरिक्त ईंधन शुल्क जोड़ने का फैसला किया है। यह शुल्क 12 मार्च से लागू किया गया है, जिससे यात्रियों की कुल टिकट कीमत और बढ़ गई है।

    एयरलाइंस कंपनियों का कहना है कि हवाई ईंधन यानी एविएशन टर्बाइन फ्यूल की कीमतों में हाल के समय में काफी बढ़ोतरी हुई है। इसके अलावा परिचालन लागत बढ़ने से भी टिकट दरों में बदलाव करना पड़ा है।

    मांग बढ़ने से भी बढ़ा किराया

    ट्रैवल एजेंसियों का कहना है कि किराए में बढ़ोतरी का एक कारण यात्रियों की बढ़ती मांग भी है। जैसे-जैसे यात्रियों की संख्या बढ़ती है और सीटों की उपलब्धता कम होती है, वैसे-वैसे टिकट की कीमतें भी बढ़ जाती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि कोई यात्री अंतिम समय में टिकट बुक करता है तो उसे और भी ज्यादा कीमत चुकानी पड़ती है। इसलिए यात्रियों को सलाह दी जाती है कि वे यात्रा की योजना पहले से बनाकर टिकट बुक करें।

    यात्रियों की बढ़ी चिंता

    हवाई किराए में बढ़ोतरी से आम यात्रियों की चिंता भी बढ़ गई है। कई यात्रियों का कहना है कि पहले जो यात्रा 8-10 हजार रुपये में हो जाती थी, अब उसी के लिए उन्हें 12-15 हजार रुपये तक खर्च करने पड़ रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आने वाले समय में हवाई ईंधन की कीमतें कम नहीं होतीं तो फ्लाइट टिकट के किराए में राहत मिलना मुश्किल हो सकता है। फिलहाल यात्रियों को बढ़े हुए किराए के साथ ही अपनी यात्रा की योजना बनानी पड़ रही है।

  • ED- झारखंड पुलिस विवाद पर हाईकोर्ट का फैसला: ईडी अफसरों पर दर्ज FIR की जांच अब CBI करेगी

    ED- झारखंड पुलिस विवाद पर हाईकोर्ट का फैसला: ईडी अफसरों पर दर्ज FIR की जांच अब CBI करेगी

    सोशल संवाद/राँची : झारखंड हाईकोर्ट ने ईडी बनाम राज्य पुलिस विवाद में बड़ा और अहम फैसला सुनाया है। यह फैसला जस्टिस संजय कुमार द्विवेदी की अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सुरक्षित रखे गए आदेश के तहत सुनाया। अपने फैसले में अदालत ने ईडी अधिकारियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर और उससे जुड़े पूरे मामले की जांच सीबीआई को सौंपने का आदेश दिया है।

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    कोर्ट के इस फैसले को राज्य सरकार और रांची पुलिस के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। ईडी ने अपने अधिकारियों के खिलाफ एयरपोर्ट थाने में दर्ज एफआईआर को निरस्त करने और मामले की निष्पक्ष जांच के लिए सीबीआई से जांच कराने की मांग की थी। हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच केंद्रीय एजेंसी को सौंपने का निर्देश दिया।

    ईडी ने पुलिस कार्रवाई को बताया दुर्भावनापूर्ण

    ईडी ने रांची पुलिस की कार्रवाई को दुर्भावनापूर्ण बताते हुए झारखंड हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर की थी। एजेंसी का कहना था कि राज्य पुलिस की कार्रवाई से केंद्रीय जांच एजेंसी के कामकाज में अनावश्यक हस्तक्षेप हो रहा है। इससे पहले 16 जनवरी को हुई सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने रांची पुलिस की जांच पर अंतरिम रोक लगा दी थी।

    उस समय अदालत ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा था कि किसी केंद्रीय एजेंसी के काम में इस तरह हस्तक्षेप करना उचित नहीं है। अदालत ने ईडी कार्यालय की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सीआईएसएफ, बीएसएफ या अन्य अर्धसैनिक बलों को सुरक्षा की जिम्मेदारी देने का निर्देश भी दिया था। साथ ही परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज को सुरक्षित रखने का आदेश दिया गया था।

  • झारखंड में मंत्रियों और विधायकों को IAS-IPS जैसी मेडिकल सुविधा देने की तैयारी, नई नियमावली जल्द

    झारखंड में मंत्रियों और विधायकों को IAS-IPS जैसी मेडिकल सुविधा देने की तैयारी, नई नियमावली जल्द

    सोशल संवाद/डेस्क : झारखंड सरकार राज्य के मंत्रियों, विधायकों और पूर्व विधायकों के लिए स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर एक बड़ा कदम उठाने की तैयारी में है। स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने घोषणा की है कि अब जनप्रतिनिधियों और उनके परिवारों को भी आईएएस और आईपीएस अधिकारियों की तर्ज पर बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।

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    रांची में मीडिया से बातचीत करते हुए स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि इस संबंध में नई नियमावली का मसौदा तैयार कर लिया गया है। उन्होंने कहा कि यह निर्णय मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के मार्गदर्शन और सहमति से लिया गया है। जल्द ही इस प्रस्ताव को कैबिनेट के सामने मंजूरी के लिए पेश किया जाएगा। कैबिनेट की स्वीकृति मिलते ही नई व्यवस्था लागू कर दी जाएगी।

    स्वास्थ्य मंत्री के अनुसार, नई नियमावली के तहत राज्य के मंत्रियों, वर्तमान विधायकों, पूर्व विधायकों और उनके परिवारों को उच्च स्तरीय चिकित्सा सुविधाएं प्रदान की जाएंगी। इसमें देश के विभिन्न बड़े अस्पतालों में बेहतर इलाज की व्यवस्था के साथ-साथ चिकित्सा खर्च की प्रतिपूर्ति यानी रीइम्बर्समेंट की सुविधा भी शामिल होगी।

    उन्होंने बताया कि यह पूरी व्यवस्था ऑल इंडिया सर्विसेज मेडिकल अटेंडेंस रूल्स, 1954 के आधार पर तैयार की जा रही है। यानी जिस तरह से आईएएस और आईपीएस अधिकारियों को चिकित्सा सुविधाएं मिलती हैं, उसी तरह की व्यवस्था जनप्रतिनिधियों के लिए भी लागू की जाएगी। चिकित्सा खर्च की प्रतिपूर्ति का भुगतान झारखंड विधानसभा सचिवालय के माध्यम से किया जाएगा।

    डॉ. इरफान अंसारी ने कहा कि स्वास्थ्य सुरक्षा हर व्यक्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। जब राज्य सरकार अपने वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों को समुचित स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराती है, तो मंत्रियों और विधायकों को भी उसी स्तर की व्यवस्था मिलनी चाहिए। उन्होंने बताया कि कई जनप्रतिनिधियों ने इलाज के दौरान आने वाली समस्याओं और अस्पतालों में पर्याप्त कवरेज न मिलने की शिकायत की थी।

    इन समस्याओं को ध्यान में रखते हुए सरकार ने मौजूदा व्यवस्था की समीक्षा की और उसके बाद नई नियमावली तैयार करने का फैसला लिया। मंत्री के अनुसार, इस नई व्यवस्था से जनप्रतिनिधियों को इलाज के दौरान होने वाली परेशानियों से काफी हद तक राहत मिलेगी।

    स्वास्थ्य मंत्री ने यह भी बताया कि झारखंड सरकार पहले से ही राज्य के सरकारी कर्मचारियों और अधिवक्ताओं को स्वास्थ्य बीमा का लाभ प्रदान कर रही है। अब जनप्रतिनिधियों को भी बेहतर और व्यवस्थित स्वास्थ्य सुविधा देने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण पहल है।

    उन्होंने कहा कि नई व्यवस्था लागू होने के बाद मंत्रियों और विधायकों के लिए देश के कई बड़े अस्पतालों में इलाज कराना आसान होगा और कई मामलों में कैशलेस इलाज की सुविधा भी उपलब्ध हो सकेगी।

    डॉ. इरफान अंसारी के अनुसार, यह कदम केवल जनप्रतिनिधियों की स्वास्थ्य सुरक्षा को मजबूत करने के लिए ही नहीं, बल्कि राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित, पारदर्शी और आधुनिक बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण साबित होगा। अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि कैबिनेट से इस प्रस्ताव को कब मंजूरी मिलती है और नई व्यवस्था कब से लागू होती है।

  • रांची यूनिवर्सिटी के सिमडेगा और मांडर कॉलेजों में नागपुरी शिक्षक की भारी कमी  छात्रों का भविष्य संकट में

    रांची यूनिवर्सिटी के सिमडेगा और मांडर कॉलेजों में नागपुरी शिक्षक की भारी कमी  छात्रों का भविष्य संकट में

    सोशल संवाद /रांची (झारखंड): रांची यूनिवर्सिटी से संबद्ध सिमडेगा कॉलेज और मांडर कॉलेज में नागपुरी भाषा के पढ़ाने के लिए एक भी स्थायी या नीड-बेस्ड शिक्षक नहीं है, जिससे छात्रों की पढ़ाई और शैक्षणिक अधिकारों पर गंभीर प्रभाव पड़ा है। यह स्थिति विद्यालय स्तर पर छायात्रा के समान है और क्षेत्रीय भाषा के संरक्षण एवं संवर्धन के प्रयासों को कमजोर कर रही है।

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    शिक्षक के अभाव से शैक्षणिक संकट
    • दोनों कॉलेजों में UG और PG स्तर पर नागपुरी भाषा के कोर्स जारी हैं, लेकिन कोई शिक्षक नियुक्त नहीं किया गया है।
    • डोरंडा कॉलेज, रांची में जहां दो स्थायी और दो नीड-बेस्ड शिक्षक कार्यरत हैं, वहीं सिमडेगा और मांडर जैसे दूरदराज इलाकों में इस विषय के लिए कोई भी शिक्षक उपलब्ध नहीं है।
    • इससे छात्रों को मूलभूत शिक्षा सुविधा से वंचित होना पड़ रहा है और उनके भविष्य पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
    क्या ये सिर्फ प्रशासनिक चूक है?

    शिक्षा विशेषज्ञों के अनुसार यह समस्या सिर्फ प्रशासनिक व्यवस्थापन की कमी नहीं है, बल्कि नीति निर्माण और नियुक्तियों में समन्वय की अनदेखी को भी दर्शाती है।
    रांची यूनिवर्सिटी के नागपुरी विभाग में कुछ शिक्षक हैं, लेकिन सिमडेगा व मांडर कॉलेज जैसी जगहों पर उनकी अनुपस्थिति से पढ़ाई की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है।

    सांस्कृतिक पहचान और मातृभाषा की भूमिका

    नागपुरी सिर्फ एक विषय नहीं है  यह झारखंड की सांस्कृतिक पहचान, लोकजीवन और भाषा-परंपरा का प्रतिनिधित्व करता है।
    शिक्षण की बुनियादी संरचना कमजोर रहने पर आने वाली पीढ़ी अपनी मातृभाषा से जुड़ नहीं पाएगी, जिसका दीर्घकालिक प्रभाव सांस्कृतिक और शैक्षणिक दोनों स्तरों पर देखने को मिल सकता है।

    छात्रों और अभिभावकों की चिंता

    यह समस्या छात्रों और उनके अभिभावकों में चिंता का विषय बनी हुई है। बिना शिक्षक के कोर्स चलने से पाठ्यक्रम पूरा नहीं हो पाता, परीक्षाएं प्रभावित होती हैं और छात्र अपनी शिक्षा के मार्ग में व्यवधान महसूस करते हैं।

    रांची यूनिवर्सिटी के सिमडेगा और मांडर कॉलेजों में नागपुरी शिक्षक की कमी न केवल छात्रों की पढ़ाई को प्रभावित कर रही है, बल्कि क्षेत्रीय भाषा के संरक्षण और संवर्धन पर भी प्रश्न चिन्ह लगा रही है।
    शिक्षा विभाग और विश्वविद्यालय प्रशासन के पास इस मुद्दे को जल्द सुलझाने का समय है ताकि स्थानीय छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से वंचित नहीं होना पड़े।

  • होली पर अलर्ट मोड: रांची के अस्पताल तैयार, इमरजेंसी 24 घंटे रहेगी चालू

    होली पर अलर्ट मोड: रांची के अस्पताल तैयार, इमरजेंसी 24 घंटे रहेगी चालू

    सोशल संवाद/डेस्क: होली के मद्देनज़र रांची के अस्पतालों ने किसी भी संभावित हादसे या स्वास्थ्य समस्या से निपटने के लिए व्यापक तैयारी कर ली है। त्योहार के दौरान बढ़ने वाली आपात स्थितियों को देखते हुए डॉक्टरों, नर्सों और पैरामेडिकल स्टाफ की अतिरिक्त ड्यूटी लगाई गई है, ताकि मरीजों को तुरंत इलाज मिल सके।

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    इमरजेंसी में विशेष व्यवस्था

    शहर के प्रमुख अस्पतालों में इमरजेंसी वार्ड को पूरी तरह सक्रिय रखा जाएगा। गंभीर मामलों के लिए जरूरी दवाइयों और मेडिकल उपकरणों का पर्याप्त स्टॉक सुनिश्चित किया गया है। ब्लड बैंक को भी अतिरिक्त रक्त उपलब्ध रखने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि आपातकालीन स्थिति में देरी न हो।

    4 मार्च को Rajendra Institute of Medical Sciences (रिम्स) और Sadar Hospital की ओपीडी सेवाएं बंद रहेंगी, लेकिन इमरजेंसी सेवाएं 24 घंटे जारी रहेंगी।

    रंग और नशापान से जुड़ी घटनाओं पर नजर

    होली के दौरान रंगों के इस्तेमाल और नशापान के कारण सड़क दुर्घटनाएं, झगड़े और स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतें बढ़ जाती हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए अस्पताल प्रशासन ने विशेष सतर्कता बरतने का फैसला किया है।

    संभावित स्वास्थ्य जोखिम

    • नशे में वाहन चलाने से सड़क हादसे
    • केमिकल रंगों से त्वचा व आंखों में जलन या संक्रमण
    • होलिका दहन के दौरान झुलसने की घटनाएं

    अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि त्योहार के दौरान किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए पूरी टीम मुस्तैद रहेगी, ताकि लोगों को समय पर और बेहतर इलाज मिल सके।

  • 27 फरवरी सुबह 8 बजे से महाकाउंटिंग! झारखंड के 48 निकायों में 1309 टेबलों पर किसकी कुर्सी

    27 फरवरी सुबह 8 बजे से महाकाउंटिंग! झारखंड के 48 निकायों में 1309 टेबलों पर किसकी कुर्सी

    सोशल संवाद/राँची : झारखंड राज्य निर्वाचन आयोग ने 48 नगर निकायों (शहरी स्थानीय निकायों) के चुनावों में डाले गए वोटों की गिनती के लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार कर ली है। मतगणना की प्रक्रिया 27 फरवरी की सुबह शुरू होगी और पूरे राज्य में कुल 1309 टेबलों पर वोटों की गिनती की जाएगी।

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    आयोग के निर्देश पर सभी जिलों में तैयारी पूरी कर ली गई है, जिसमें सुरक्षा व्यवस्था, काउंटिंग सेंटर, स्टाफ की तैनाती और सीसीटीवी निगरानी शामिल है। पार्षद (वार्ड सदस्य) और मेयर (अध्यक्ष) के लिए गणना अलग-अलग होगी, जिसमें पार्षदों की गिनती मल्टी-राउंड में और मेयर की सिंगल या कम राउंड में होगी।

    मतगणना का शेड्यूल और समय

    शुरुआत का समय: मतगणना 27 फरवरी को सुबह 8 बजे से शुरू होगी। सबसे पहले पोस्टल बैलट की गिनती की जाएगी, उसके बाद ईवीएम से वोटों की काउंटिंग होगी। समाप्ति और रिजल्ट घोषणा: गिनती की प्रक्रिया उसी दिन पूरी होने की उम्मीद है, लेकिन निकाय के आकार, वार्डों की संख्या और राउंड्स के आधार पर कुछ जगहों पर शाम तक या अगले दिन तक परिणाम घोषित हो सकते हैं। प्रत्येक राउंड की गिनती के बाद आंशिक परिणामों की घोषणा की जाएगी, और अंतिम रिजल्ट प्रमाणित होने के बाद जारी किया जाएगा।

    कुल अवधि: छोटे निकायों में 2-3 राउंड में काम पूरा हो सकता है, जबकि बड़े नगर निगमों जैसे रांची में 5 राउंड, बोकारो में 9 राउंड तक लग सकते हैं। आयोग ने कहा है कि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और निष्पक्ष होगी। परिणाम कब?: अधिकांश निकायों के रिजल्ट 27 फरवरी शाम तक आ जाएंगे, लेकिन देरी होने पर 28 फरवरी तक घोषित किए जा सकते हैं। आधिकारिक वेबसाइट और मीडिया के माध्यम से अपडेट उपलब्ध होंगे।

    गणना की प्रक्रिया: पार्षद और मेयर के लिए अलग-अलग व्यवस्था

    राज्य निर्वाचन आयोग के अनुसार, पार्षद (वार्ड काउंसलर) और मेयर (नगर निगम/परिषद अध्यक्ष) के लिए मतगणना अलग-अलग टेबलों पर होगी। पार्षदों की गिनती वार्ड-वार होगी, जबकि मेयर की गिनती पूरे निकाय के वोटों पर आधारित होगी और कम राउंड में पूरी हो जाएगी। सभी काउंटिंग सेंटरों में तीन स्तर की सुरक्षा होगी, जिसमें पुलिस, सीआरपीएफ और स्थानीय फोर्स शामिल हैं। प्रत्येक टेबल पर पर्यवेक्षक, कैंडिडेट एजेंट और मीडिया की निगरानी रहेगी। ईवीएम की रैंडम चेकिंग भी की जाएगी।

  • हुंडरू फॉल में रोप वे का होगा विकास: पतरातू में सोलर बोट और फ्लोटिंग रेस्टोरेंट की मिलेगी सुविधा

    हुंडरू फॉल में रोप वे का होगा विकास: पतरातू में सोलर बोट और फ्लोटिंग रेस्टोरेंट की मिलेगी सुविधा

    सोशल संवाद/राँची : झारखंड के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए मंगलवार को बजट पेश किया। उन्होंने कुल 1, 58, 560 करोड़ रुपए का बजट पेश किया गया। सरकार पर्यटन, कला संस्कृति, खेलकूद एवं युवा कार्य के लिए 361 करोड़ 67 लाख रुपए, प्रारंभिक एवं माध्यमिक शिक्षा पर 16 हजार 251 करोड़ 43 लाख रुपए और उच्च एवं तकनीकी शिक्षा के लिए 2 हजार 564 करोड़ 45 लाख रुपए का बजट रखा है।

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    पर्यटन, कला संस्कृति, खेलकूद एवं युवा कार्य क्षेत्र में क्या-क्या होगा

    रांची स्थित दशम फॉल ग्लास ब्रिज का निर्माण, जोन्हा जलप्रपात में ग्लास ब्रिज एवं रोप वे का निर्माण किया जाएगा। वहीं, हुंडरू फॉल में रोप वे का विकास कार्य कराया जाएगा।

    रामगढ़ स्थित रजरप्पा में पर्यटकीय विकास के साथ पतरातू में स्काइवॉक एवं पतरातू जलाशय में सोलर बोट और फ्लोटिंग रेस्टोरेंट बनाया जाएगा। लातेहार स्थित नेतरहाट में कोयल व्यू प्वाइंट पर ग्लास वॉच टॉवर का निर्माण एवं मैगनोलिया प्वाइंट में स्काइवॉक का निर्माण कराया जाएगा।

    देवघर पुनासी डैम का पर्यटकीय विकास, पलामू स्थित मलय डैम का पर्यटकीय विकास, चतरा स्थित कोलेश्वर पहाड़ में रोप वे का विकास एवं खूंटी जिला पेरवाघाघ जलप्रपात और पांडू-पुडिंग पिकनिक स्थल के इको पर्यटन सर्किट का विकास कार्य कराया जाएगा।

    खनन पर्यटन विकसित करने के लिए आईटीडीसीएल और सीसीएल के बीच एमओयू किया गया है। गिरिडीह के बेंगाबाद स्थित मौजा कर्णपुरा में आउटडोर स्टेडियम की स्वीकृति दी गई है। कमार दुधानी, दुमका स्थित आउटडोर स्टेडियम में 8 लेन का आधुनिक सिंथेटिक एथलेटिक्स ट्रैक बनाया जाएगा। सिल्ली में संचालित आवासीय तीरंदाजी क्रीड़ा प्रशिक्षण केंद्र में 25 शैय्या वाले खेल छात्रावास निर्माण की स्वीकृति दी गई है।

  • झारखंड में सड़क दुर्घटना मुआवजा: 14.59 करोड़ रुपये अब भी बिना दावा, जागरूकता की कमी उजागर

    झारखंड में सड़क दुर्घटना मुआवजा: 14.59 करोड़ रुपये अब भी बिना दावा, जागरूकता की कमी उजागर

    सोशल संवाद/रांची: झारखंड में सड़क दुर्घटनाओं के पीड़ित परिवारों को राहत देने के लिए अदालतें लगातार मुआवजा राशि का आदेश दे रही हैं, लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि करोड़ों रुपये की यह राशि वर्षों से बिना दावा के पड़ी हुई है। राज्य में वाहन दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण (एमएसीटी) के आदेशों के बावजूद 14.59 करोड़ रुपये से अधिक का मुआवजा अब तक लाभार्थियों द्वारा नहीं लिया गया है। यह स्थिति न केवल जागरूकता की कमी, बल्कि प्रशासनिक और प्रक्रिया संबंधी खामियों की ओर भी संकेत करती है।

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    आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, लेबर कोर्ट के मामलों में भी 2.68 करोड़ रुपये की राशि बिना दावा के लंबित है। इन मामलों की विस्तृत जानकारी हाई कोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध है, जहां केस नंबर और संबंधित मुआवजा राशि का विवरण दर्ज है। बावजूद इसके, बड़ी संख्या में पात्र परिवार राशि लेने आगे नहीं आ रहे हैं।

    धनबाद और हजारीबाग में सबसे अधिक लंबित राशि

    जिलावार आंकड़ों पर नजर डालें तो धनबाद और हजारीबाग की स्थिति सबसे चिंताजनक है। धनबाद में 77 सड़क दुर्घटना मामलों में करीब 7.83 करोड़ रुपये का भुगतान आदेशित हुआ था, जिसमें से 7.42 करोड़ रुपये सड़क हादसों से जुड़े मामलों के हैं, जबकि 41.34 लाख रुपये अन्य मद के हैं। यह पूरी राशि अब भी बिना दावा के पड़ी है।

    हजारीबाग में 79 मामलों में 3.43 करोड़ रुपये के भुगतान का आदेश हुआ, जो अब तक लंबित है। रांची में 1.39 करोड़ रुपये सड़क दुर्घटना मामलों में और 12.05 लाख रुपये लेबर कोर्ट के मामलों में बिना दावा के जमा हैं।

    कुछ जिलों में बेहतर स्थिति

    हालांकि गुमला, जामताड़ा, कोडरमा और लातेहार जैसे जिलों में अदालत के आदेश के बाद मुआवजा राशि का शत-प्रतिशत भुगतान हो चुका है। गुमला में 2.30 करोड़, जामताड़ा में 22.06 लाख, कोडरमा में 48.52 लाख और लातेहार में 56.38 लाख रुपये का वितरण किया गया है। यह दर्शाता है कि सही प्रयास और जागरूकता से लंबित मामलों को सुलझाया जा सकता है।

    प्रक्रिया तेज करने के निर्देश

    मोटर दुर्घटना मामलों में देरी कम करने के लिए झारखंड पुलिस को निर्देश दिया गया है कि मौत से जुड़े मामलों की जांच रिपोर्ट एक महीने के भीतर ट्रिब्यूनल को भेजी जाए। 14 बिंदुओं पर विस्तृत रिपोर्ट देना अनिवार्य किया गया है ताकि मुआवजा प्रक्रिया में पारदर्शिता और गति बनी रहे।

    सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के निर्देशों के अनुसार, केवल समय सीमा के आधार पर मोटर दुर्घटना क्लेम याचिका खारिज नहीं की जा सकती। साथ ही मई 2025 से आधार और पैन कार्ड का विवरण अनिवार्य कर दिया गया है, जिससे सही लाभार्थी तक राशि पहुंच सके।

  • रांची नगर निगम चुनाव 2026: प्रचार थमा, आखिरी दिन करोड़ों खर्च, अब डोर-टू-डोर संपर्क तेज

    रांची नगर निगम चुनाव 2026: प्रचार थमा, आखिरी दिन करोड़ों खर्च, अब डोर-टू-डोर संपर्क तेज

    सोशल संवाद/डेस्क : रांची नगर निगम चुनाव 2026 को लेकर शहर में कई दिनों से चल रहा चुनावी शोर अब थम चुका है। शनिवार शाम पांच बजे के बाद सार्वजनिक प्रचार पर रोक लग गई, लेकिन मतदान से ठीक पहले प्रत्याशियों ने जनसमर्थन जुटाने में पूरी ताकत झोंक दी। अनुमान है कि प्रचार के अंतिम दिन मेयर और पार्षद उम्मीदवारों ने मिलकर करीब साढ़े पांच करोड़ रुपये खर्च किए।

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    23 फरवरी को होने वाले मतदान से पहले यह आखिरी मौका था, जब उम्मीदवार खुलकर रैलियां, पदयात्राएं और बाइक जुलूस निकाल सकते थे। शहर के अलग-अलग वार्डों में सुबह से ही चुनावी हलचल तेज रही। सैकड़ों बाइक के साथ शक्ति प्रदर्शन, बैनर-पोस्टर और समर्थकों की भीड़ ने माहौल को पूरी तरह चुनावी रंग में रंग दिया।

    इस बार रांची नगर निगम चुनाव में मेयर पद के लिए 11 प्रत्याशी मैदान में हैं, जबकि 364 पार्षद उम्मीदवार अपने-अपने वार्ड में किस्मत आजमा रहे हैं। प्रचार के अंतिम दिन कई प्रत्याशियों ने समर्थकों को एकजुट करने के लिए विशेष रणनीति अपनाई। जानकारी के अनुसार, बाइक रैली में शामिल होने वाले समर्थकों को पेट्रोल खर्च के लिए प्रति बाइक लगभग 200 रुपये और कुछ जगहों पर प्रति व्यक्ति 500 रुपये तक नकद राशि दी गई। इसके अलावा भोजन और अन्य व्यवस्थाओं पर भी खर्च किया गया।

    यदि औसतन प्रत्येक पार्षद प्रत्याशी द्वारा अंतिम दिन करीब डेढ़ लाख रुपये खर्च मानें, तो कुल खर्च का आंकड़ा करोड़ों में पहुंच जाता है। मेयर प्रत्याशियों के बड़े स्तर के प्रचार कार्यक्रमों को जोड़ दिया जाए तो यह राशि और भी अधिक हो सकती है। हालांकि, वास्तविक खर्च का आकलन चुनाव आयोग की रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा।

    प्रचार अवधि समाप्त होने के बाद अब प्रत्याशी ‘डोर-टू-डोर’ अभियान पर फोकस कर रहे हैं। रविवार देर रात तक उम्मीदवार अपने समर्थकों के साथ घर-घर जाकर मतदाताओं से संपर्क करेंगे। चुनावी भाषा में इसे निर्णायक समय माना जाता है, क्योंकि व्यक्तिगत मुलाकात का असर मतदाताओं के फैसले पर महत्वपूर्ण माना जाता है।

    शहर के विभिन्न इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी कर दी गई है। प्रशासन ने मतदान को शांतिपूर्ण और निष्पक्ष कराने के लिए विशेष तैयारी की है। मतदान केंद्रों पर सुरक्षा बलों की तैनाती और संवेदनशील क्षेत्रों की निगरानी की जा रही है।

    अब सबकी नजरें 23 फरवरी को होने वाले मतदान और उसके बाद आने वाले नतीजों पर टिकी हैं। यह चुनाव न सिर्फ नगर निगम की सत्ता तय करेगा, बल्कि आने वाले वर्षों में रांची के विकास की दिशा भी निर्धारित करेगा। मतदाता किसे अपना प्रतिनिधि चुनते हैं, इसका फैसला जल्द ही सामने होगा।

  • सिर्फ संदेह के आधार पर नहीं हो सकता तलाक, झारखंड हाई कोर्ट का बड़ा फैसला

    सिर्फ संदेह के आधार पर नहीं हो सकता तलाक, झारखंड हाई कोर्ट का बड़ा फैसला

    सोशल संवाद/राँची : झारखंड हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा है कि केवल संदेह और सामान्य आरोपों के आधार पर तलाक नहीं दिया जा सकता। अदालत ने पति की तलाक याचिका खारिज करते हुए परिवार न्यायालय के फैसले को बरकरार रखा। आइए जानते हैं पूरा मामला क्या है।

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    हाईकोर्ट की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि व्यभिचार जैसे गंभीर आरोपों के लिए ठोस और विश्वसनीय साक्ष्य जरूरी हैं। पति ने पत्नी पर अवैध संबंध, क्रूरता और परित्याग के आरोप लगाए थे, लेकिन उनके समर्थन में कोई प्रत्यक्ष प्रमाण या दस्तावेज पेश नहीं किए गए। कॉल डिटेल्स या अन्य साक्ष्य भी अदालत के सामने नहीं रखे गए।

    अदालत ने कहा कि वैवाहिक जीवन में सामान्य मतभेद या झगड़े को क्रूरता नहीं माना जा सकता। पत्नी के घर छोड़ने की घटना को भी विधिक रूप से परित्याग साबित करने योग्य नहीं पाया गया, क्योंकि इसके आवश्यक कानूनी तत्व सिद्ध नहीं हुए। कोर्ट ने माना कि परिवार न्यायालय ने उपलब्ध साक्ष्यों का सही मूल्यांकन किया है और उसके फैसले में कोई कानूनी त्रुटि नहीं है।