सोशल संवाद / डेस्क : चाईबासा में आयोजित जनजातीय गरिमा उत्सव-2026 के तहत “जन भागीदारी – सबसे दूर, सबसे पहले” अभियान के अंतर्गत एक भव्य संवाद-सह-समारोह का आयोजन किया गया। पश्चिमी सिंहभूम जिले के कोल्हन विश्वविद्यालय स्थित ऑडिटोरियम में आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में पारंपरिक ग्राम प्रतिनिधि, जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी शामिल हुए।
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कार्यक्रम में मानकी, मुण्डा, ग्राम प्रधान, डाकुवा और दिऊरी जैसे पारंपरिक प्रतिनिधियों को सम्मानित कर उनकी सामाजिक भूमिका और ग्रामीण विकास में योगदान को सराहा गया। समारोह में जोबा माझी, निरल पूर्ति, सोनाराम सिंकु, उपायुक्त मनीष कुमार और पुलिस अधीक्षक अमित रेनु सहित कई अधिकारी मौजूद रहे।
पारंपरिक रीति-रिवाज के साथ हुआ शुभारंभ
कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक आदिवासी रीति-रिवाजों के साथ अतिथियों के स्वागत से हुई। इस दौरान धरती आबा बिरसा मुंडा और वीर शहीद पोटो हो की तस्वीर पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इसके बाद दीप प्रज्वलन कर समारोह का विधिवत उद्घाटन किया गया।
86 मानकी हुए सम्मानित
समारोह के दौरान 86 मानकी को प्रशस्ति पत्र, अंगवस्त्र और पौधा देकर सम्मानित किया गया। वहीं 4 मानकी और 21 मुण्डा को नियुक्ति पत्र भी प्रदान किए गए। वक्ताओं ने कहा कि गांवों के विकास और जनहितकारी योजनाओं के सफल क्रियान्वयन में पारंपरिक ग्राम प्रतिनिधियों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है।
“जन भागीदारी” अभियान का उद्देश्य
अधिकारियों ने बताया कि “जन भागीदारी – सबसे दूर, सबसे पहले” अभियान का मुख्य उद्देश्य सुदूरवर्ती और जनजातीय क्षेत्रों तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाना है। इसके माध्यम से ग्रामीणों की समस्याओं का समाधान, जनजागरूकता और ग्राम सभाओं की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जा रही है।
ग्रामीण विकास में ग्राम सभा की भूमिका अहम
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि ग्राम सभा की सक्रिय भागीदारी के बिना गांवों का समग्र विकास संभव नहीं है। पारंपरिक व्यवस्था और प्रशासन के समन्वय से ही जनकल्याणकारी योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाया जा सकता है।
जनजागरूकता रथ को दिखाई गई हरी झंडी
कार्यक्रम के समापन पर पौधारोपण किया गया और जनजागरूकता रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया। इस अभियान के जरिए ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता फैलाने और सरकारी योजनाओं की जानकारी पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।










