April 18, 2024 6:53 pm
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स्त्री होने पर मलाल नही , गुरुर करना……..

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सोशल संवाद / डेस्क : महिला समाज का एक अहम् हिस्सा है ,और आज के समय में महिला देश के निर्माण में अपनी भूमिका निभा रही है हर एक छेत्र में अपनी पहचान बना रही है , खेल हो या मनोरजन राजनीती से लेकर न्याय करने तक महिलाएँ किसी भी स्थान में अब पुरुषो से पीछे नही रही हर वर्ष 8 मार्च को महिला दिवस मनाया जाता है….

महिला दिवस मनाने के लिए 8 मार्च ही क्यों?

इसकी पीछे की कहानी शुरू होती है  यूरोप और अमेरिका में वहा की महिलायों ने आंदोलन किया और इस आंदोलन में ये महिलाएं महिलाओं के काम के घंटों में कमी, काम करने पर अच्छी सैलेरी और वोट डालने के अधिकार की मांग कर रही थी. ये आंदोलन लगभग 116 साल पहले साल 1908 में किया गया था.इसके साथ ही न्यूयॉर्क शहर में हजारों की संख्या में महिलाओं ने अपनी मांगों को लेकर परेड निकाली थी.इसके बाद साल 1975 में संयुक्त राष्ट्र ने 08 मार्च को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के रूप में मनाने के लिए मान्यता दी.

दुनिया में स्त्री का महत्व

स्त्री संसार की रीढ़ है, समाज को पूर्व-साक्षर से साक्षर बनाने में महिलाओं का योगदान भी निर्विवाद है। बुनियादी शिक्षा राष्ट्र के विकास की कुंजी है।  कृषि उत्पादकता में सुधार से लेकर लड़कियों और महिलाओं की स्थिति में सुधार कर सकती है, पर्यावरण संरक्षण को बढ़ा सकती है और जीवन स्तर को व्यापक रूप से ऊपर उठा सकती है। और ऐसा कोई कार्य है ही नही जिसे स्त्री कर नही सकती , वो रोटी पकाने से लेकर रोटी कमाने का ज्ज्स्बा जो रखती है

राजनीति में महिलाओं का प्रतिनिधित्व

राजनीतिक परिदृश्य में महिला प्रतिनिधियों की हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए आरक्षण एक महत्वपूर्ण कदम है। पिछले लोकसभा चुनाव में सिर्फ 11 प्रतिशत महिलाएं सांसद बन पाई थीं। आरक्षण की मांग और महत्वपूर्ण इसलिए भी हो जाती है क्योंकि पार्टियां महिलाओं को अपेक्षा के मुताबिक टिकट नहीं दे रही हैं। पार्टियां उन्हीं महिलाओं को टिकट दे रही हैं जो चर्चित रही हों या जिनकी कोई राजनीतिक विरासत हो। अधिकांश पार्टियां अपनी उन महिला कार्यकर्ताओं की अनदेखी कर रही हैं जो जमीनी स्तर पर काम कर रही हैं। अगर महिलाओं को टिकट मिलता भी है तो भी उनकी राह आसान नहीं है। पूरे चुनाव प्रक्रिया में विभिन्न स्तर पर पुरुषों का वर्चस्व है।

खेल जगत में महिलाओं का प्रदर्शन

भारतीय खेल जगत में महिलाओ का अभूतपूर्व योगदान रहा है। जिसे भुलाया नहीं जा सकता। भारतीय महिलाओं ने खेल जगत में एक स्वर्णिम युग का निर्माण किया है। मुश्किल हालातों का सामना करते हुए कामयाबी की बुलंदियों को छुआ है। महिलाओं ने अपने खेल प्रदर्शन से आने वाली पीढ़ी के लिए मापदंड स्थापित किये है। इन महिलाओं ने खेलो में शीर्ष स्थान प्राप्त करने के साथ साथ युवा पीढ़ी को भी प्रेरित किया हैमनोरंजन जगत में महिलाओं का चित्रण

मनोरंजन जगत में महिलाओं का चित्रण

मनोरंजन और मीडिया प्लेटफॉर्म के बारे में बात करते हैं, तो वे केवल पुरुष स्टार लीड के बारे में सोचते हैं। मनोरंजन उद्योग में दशकों से समाज के पुरुष वर्ग का वर्चस्व रहा है। आज भी मनोरंजन उद्योग पूरी तरह से पुरुषों पर केंद्रित है और महिला वर्ग को ध्यान आकर्षित करने वाली वस्तु के रूप में चित्रित किया जाता है। क्या ये सिर्फ इंडस्ट्री की गलती है? नहीं, यह हम भी हैं। रूढ़िवादिता पैदा करने के लिए हम दोषी हैं। हमने महिलाओं को एक गौण चरित्र या एक ऐसे चरित्र के रूप में देखा है जिसका कोई महत्व नहीं है। महिलाओं को गृहिणी के रूप में चित्रित किया जाता है जबकि पुरुषों को पैसा कमाने वाले और घर के मुखिया के रूप में दिखाया जाता है।

क्या महिलाएं सुरक्षित है ?

भारत में महिलाओं की सुरक्षा के मुद्दे पर बात करना एक व्यापक और गंभीर विषय है। सच यह है कि भारत में कई स्थानों पर महिलाओं को सुरक्षित रहने में कठिनाइयां हो सकती हैं और उन्हें सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक समार्थन मिलना जरूरी है। हालांकि, यह भी सच है कि सरकार और समाज दोनों ने महिलाओं की सुरक्षा और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए काम किया है।

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